स्पाइसी फूड

स्पाइसी फूड खाने के फायदे

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इंडियन फूड खाने का मजा ही अलग है। अलग-अलग प्रकार के मसालो से मां के हाथ के खाने का स्वाद और बढ़ जाता है। लेकिन बदलती लाइफस्टाइल के बीच कुछ लोग स्पाइसी फूड / मसालेदार खाने से दूर रहते हैं।

 

ऐसे लोग जिनको किसी भी प्रकार की हेल्थ प्रॉब्लम होती है, उनके लिए डॉक्टर तेज मसालों का सेवन मना करते हैं। कुछ यंगस्टर्स भी तेज मसालों वाले भोजन से दूर ही रहते हैं।

लेकिन शायद ही आप इस बात पर यकीन करें कि मसालों का सेवन आपकी ओवरऑल हेल्थ के लिए अच्छा हो सकता है। मसालों से हमारा मतलब हरी मिर्च और लाल मिर्च से नहीं है।

 

मिर्च में कैप्साइसिन नामक यौगिक होता है, जो खाने के बाद होने वाली जलन का कारण बनता है। लेकिन मिर्ची के साथ दालचीनी, हल्दी, लहसुन, अदरक, जीरा युक्त मॉडरेट भोजन के कई फायदे हो सकते हैं।

 

यूएसडीए नेशनल न्यूट्रिएंट डेटाबेस के अनुसार, हरी और लाल मिर्च में जरूरी खनिज पाए जाते हैं। इनमें विटामिन सी भी भरपूर मात्रा में होता है।

 

वजन कम करने या मेटाबॉलिज्म बढ़ाने , दोनों ही कंडीशन में हेल्दी-बैलेंस डाइट , हैवी वर्कआउट के साथ कार्डियो जरूरी होता है। लेकिन स्पाइसी फूड भी वजन कम करने में मददगार साबित हो सकता है।

 

  1. वजन कम करे

 

मसाले या मिर्च खाने को अधिक टेस्टी बना सकते हैं। यदि आप वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं तो मिर्च या मसालेदार खाना आपके लिए फायदेमंद रहेगा।

 

इसके अलावा यह आपके मेटाबॉलिज्म को भी बढ़ाता है। रिसर्च से पता चलता है कि मिर्च के मुख्य यौगिक कैप्साइसिन में थर्मोजेनिक प्रभाव होता है। खाने के 20 मिनट बाद तक एक्स्ट्रा कैलोरी जलाने का कारण बनता है। अधिक कैलोरी बर्न होने से वजन कम होने के चांस बढ़ जाते हैं और मेटाबॉलिज्म भी फास्ट हो जाता है।

 

 

  1. लिवर को होने वाले नुकसान को रोक सकता है

 

यूरोपियन एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ द लिवर 2017 के मुताबिक चूहों में कैप्साइसिन वाली डाइट लेने से लिवर को होने वाले नुकसान को रोकने में मदद मिलती है।

 

नई रिसर्च से यह भी पता चलता है कि मिर्च के एक्टिव कम्पाउंड कैप्साइसिन के दैनिक सेवन से लिवर की क्षति पर लाभकारी प्रभाव पड़ सकता है।

 

यह इस पर निर्भर करता है कि पहले लिवर को क्या नुकसान हुआ था। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह मनुष्यों में उसी तरह काम करेगा या नहीं।

 

  1. हार्ट हेल्थ को दुरुस्त रखे

 

रिसर्च से यह भी साफ हुआ कि मसालेदार भोजन खाने वाले लोगों को हार्ट अटैक और स्ट्रोक की समस्याएं कम होती हैं। इसका कारण है कैयेन काली मिर्च , लाल मिर्च मिर्च और जैलापेनोस में पाया जाने वाला सक्रिय तत्व कैप्साइसिन मिर्च एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल) के हानिकारक प्रभावों को कम कर सकता है।

 

वहीं कैप्साइसिन सूजन से लड़ सकता है, जो कि हार्ट संबंधित समस्याओं के लिए जिम्मेदार हो सकती है।

 

 

  1. कैंसर से बचाव में सहायक

 

कैप्साइसिन, एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करता है और फ्री रेडिकल्स नामक हानिकारक अणुओं से कोशिकाओं की रक्षा करता है, जो कैंसर का कारण बनते हैं।

 

अमेरिकन एसोसिएशन फॉर कैंसर रिसर्च के अनुसार, कैप्साइसिन में कैंसर और ल्यूकेमिक कोशिकाओं को मारने की क्षमता होती है।

 

स्पाइसी फूड में मौजूद कैप्साइसिन कैंसर कोशिकाओं को धीमा और नष्ट करने में मदद कर सकती है। UCLA के एक अध्ययन में पाया गया कि कैप्साइसिन ने स्वस्थ कोशिकाओं को बनाते हुए चूहों में प्रोस्टेट कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोक दिया था।

 

  1. ब्लड प्रेशर संतुलित करने में मदद करें

 

यदि आप संतुलित मात्रा में स्पाइसी फूड का सेवन करते हैं तो यह ब्लड प्रेशर मेंटेन करने में भी आपकी मदद कर सकता है।

 

2010 में हुई सेल प्रेस की एक स्टडी के मुताबिक मिर्च में मौजूद कैप्साइसिन ब्लड प्रेशर को कम करता है क्योंकि यह रक्त वाहिकाओं को अधिक ‘शिथिल’ करता है।

 

इससे हमारी ब्लड बेसिल्स को अधिक कॉन्ट्रैक्ट किया जाता है, जो उनके प्रभाव को रोकते हैं और बेसिल्क को चौड़ा करते हैं। बेहतर ब्लड फ्लो के लिए कोशिकाओं का चौड़ा होना जरूरी है जिससे शरीर अच्छे से फंक्शन करता है।

 

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Raghunath Samantaray
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